क्लासरूम में 'वर्चुअल रियलिटी' (VR) की एंट्री: भारत के 10,000 सरकारी स्कूलों में 'मेटावर्स लैब' शुरू; अब घर बैठे छात्र देखेंगे 'हड़प्पा और अंतरिक्ष' का सजीव दृश्य

क्लासरूम में 'वर्चुअल रियलिटी' (VR) की एंट्री: भारत के 10,000 सरकारी स्कूलों में 'मेटावर्स लैब' शुरू; अब घर बैठे छात्र देखेंगे 'हड़प्पा और अंतरिक्ष' का सजीव दृश्य

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली/बेंगलुरु (3 अप्रैल 2026): शिक्षा मंत्रालय ने 'राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020' के अगले चरण में 'इमर्सिव लर्निंग' (Immersive Learning) प्रोग्राम लॉन्च किया है। इसके तहत देश के दुर्गम ग्रामीण इलाकों के स्कूलों को 'VR हेडसेट्स' और '3D लर्निंग मॉड्यूल' प्रदान किए गए हैं।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • इतिहास और विज्ञान का जीवंत अनुभव: अब छात्रों को केवल किताबों से 'हड़प्पा सभ्यता' के बारे में नहीं पढ़ाया जाएगा, बल्कि वे VR पहनकर डिजिटल रूप से उन गलियों में घूम सकेंगे। विज्ञान के छात्र मानव शरीर के अंगों या सौरमंडल की यात्रा 'वर्चुअल' तरीके से कर सकेंगे।

  • जटिल विषयों का सरलीकरण: गणित और भौतिकी के कठिन सिद्धांतों को 3D विजुअलाइजेशन के जरिए समझाना आसान हो गया है। इससे छात्रों के सीखने की क्षमता (Retention Rate) में 60% की वृद्धि दर्ज की गई है।

  • रिमोट ट्रेनिंग: दूरदराज के शिक्षक अब दिल्ली या मुंबई के सर्वश्रेष्ठ प्रोफेसरों की 'वर्चुअल वर्कशॉप' में हिस्सा ले रहे हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में क्षेत्रीय असमानता कम हो रही है।

  • कम लागत वाले स्वदेशी उपकरण: भारतीय स्टार्टअप्स ने किफायती 'मेड इन इंडिया' VR ग्लास विकसित किए हैं, जिन्हें साधारण स्मार्टफोन के साथ जोड़कर उपयोग किया जा सकता है।

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