चिकित्सा क्षेत्र में चमत्कार: भारत में सफल हुआ पहला '3D प्रिंटेड कोर्निया' ट्रांसप्लांट; अब अंगों के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार

चिकित्सा क्षेत्र में चमत्कार: भारत में सफल हुआ पहला '3D प्रिंटेड कोर्निया' ट्रांसप्लांट; अब अंगों के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार

12, 2, 2026

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हैदराबाद/नयी दिल्ली (3 अप्रैल 2026): भारतीय वैज्ञानिकों ने अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। एलवी प्रसाद आई इंस्टीट्यूट और आईआईटी हैदराबाद के शोधकर्ताओं ने एक मरीज में सफलतापूर्वक '3D प्रिंटेड कोर्निया' का प्रत्यारोपण किया है। यह तकनीक अंधापन दूर करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • बायो-इंक का उपयोग: यह कोर्निया पूरी तरह कृत्रिम नहीं है, बल्कि इसे मानव डोनर के ऊतकों (Tissues) से तैयार 'बायो-इंक' के जरिए लैब में प्रिंट किया गया है। यह मरीज की आंखों के साथ पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से घुल-मिल जाता है।

  • डोनर की कमी का समाधान: भारत में हर साल लाखों लोग कोर्निया डोनर न मिलने के कारण दृष्टिहीन रह जाते हैं। 3D बायोप्रिंटिंग तकनीक से अब मांग के अनुसार 'कस्टमाइज्ड अंग' तैयार किए जा सकेंगे।

  • भविष्य का रोडमैप: वैज्ञानिक अब 3D प्रिंटेड त्वचा (Skin) और गुर्दे (Kidney) के ऊतकों पर काम कर रहे हैं। उम्मीद है कि अगले 10 वर्षों में जटिल अंगों का प्रत्यारोपण भी इसी तकनीक से संभव होगा।

  • सस्ता इलाज: बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू होने के बाद, इन अंगों की कीमत पारंपरिक प्रत्यारोपण सर्जरी की तुलना में काफी कम होगी, जिससे गरीब मरीजों को नई जिंदगी मिल सकेगी।

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