अंतरिक्ष पर्यटन का सपना सच होने के करीब: इसरो (ISRO) ने शुरू किया 'गगनयान-टूरिज्म' मॉड्यूल का परीक्षण; 2030 तक आम नागरिक भी कर सकेंगे पृथ्वी की कक्षा की सैर
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अंतरिक्ष पर्यटन का सपना सच होने के करीब: इसरो (ISRO) ने शुरू किया 'गगनयान-टूरिज्म' मॉड्यूल का परीक्षण; 2030 तक आम नागरिक भी कर सकेंगे पृथ्वी की कक्षा की सैर

12, 2, 2026

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बेंगलुरु (4 अप्रैल 2026): चंद्रमा और शुक्र के बाद अब इसरो (ISRO) का अगला लक्ष्य आम भारतीयों को अंतरिक्ष की सैर कराना है। 'गगनयान' मिशन की सफलता के बाद, इसरो ने अब 'लो अर्थ ऑर्बिट' (LEO) पर्यटन के लिए एक विशेष हाइब्रिड कैप्सूल का डिजाइन तैयार कर लिया है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • प्रशिक्षण और चयन: इसरो अब निजी क्षेत्र के साथ मिलकर 'स्पेस ट्रेनिंग सेंटर' खोल रहा है, जहाँ नागरिक अंतरिक्ष यात्रा के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार हो सकेंगे।

  • लागत में कटौती: स्वदेशी तकनीक और पुनः प्रयोज्य रॉकेट (Reusable Rockets) के उपयोग से इसरो का लक्ष्य अंतरिक्ष यात्रा की लागत को अंतरराष्ट्रीय निजी कंपनियों (जैसे स्पेसएक्स) की तुलना में 50% कम रखना है।

  • स्पेस होटल का खाका: भारतीय स्टार्टअप्स अब इसरो के साथ मिलकर 'इनफ्लेटेबल स्पेस हैबिटेट' (Inflatable Habitat) पर काम कर रहे हैं, जो भविष्य में अंतरिक्ष में छोटे स्टेशनों के रूप में पर्यटकों के ठहरने का स्थान बनेंगे।

  • वैज्ञानिक लाभ: अंतरिक्ष पर्यटन से होने वाली आय का उपयोग इसरो अपने भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अन्वेषणों (Deep Space Exploration) के लिए करेगा।

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