कूनो नेशनल पार्क में 'चीता' परिवार का विस्तार: 5 और शावकों का जन्म; भारत बना दुनिया का पहला सफल अंतर-महाद्वीपीय वन्यजीव स्थानांतरण केंद्र
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कूनो नेशनल पार्क में 'चीता' परिवार का विस्तार: 5 और शावकों का जन्म; भारत बना दुनिया का पहला सफल अंतर-महाद्वीपीय वन्यजीव स्थानांतरण केंद्र

12, 2, 2026

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श्योपुर/नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): भारत के 'प्रोजेक्ट चीता' ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ने 5 स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। इसके साथ ही भारत में चीतों की कुल संख्या अब 40 के पार पहुँच गई है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • प्रजनन दर में सुधार: वैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय घास के मैदान (Grasslands) चीतों के लिए अनुकूल साबित हुए हैं। चीतों की नई पीढ़ी अब भारतीय जलवायु और शिकार (चीतल, सांभर) की पूरी तरह आदी हो गई है।

  • इको-टूरिज्म का उदय: चीतों के आगमन से मध्य प्रदेश में पर्यटन राजस्व में 200% की वृद्धि हुई है। सरकार ने अब कूनो के आसपास 'होमस्टे' और 'गाइड ट्रेनिंग' के जरिए स्थानीय समुदायों को रोजगार से जोड़ा है।

  • नया गलियारा (Corridor): चीतों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अब उन्हें राजस्थान के 'मुकुंदरा हिल्स' और गांधी सागर अभयारण्य में भी स्थानांतरित करने की योजना शुरू हो गई है।

  • ग्लोबल मॉडल: दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया के विशेषज्ञों ने भारतीय मॉडल की सराहना की है। अब अन्य देश भी विलुप्त होती प्रजातियों को दोबारा बसाने के लिए भारत से तकनीक साझा करने का अनुरोध कर रहे हैं।

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