हरित ऊर्जा का वैश्विक निर्यातक बना भारत: जर्मनी को भेजी गई 'ग्रीन अमोनिया' की पहली खेप; शून्य उत्सर्जन की दिशा में बड़ी उपलब्धि
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हरित ऊर्जा का वैश्विक निर्यातक बना भारत: जर्मनी को भेजी गई 'ग्रीन अमोनिया' की पहली खेप; शून्य उत्सर्जन की दिशा में बड़ी उपलब्धि

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली/कांडला (4 अप्रैल 2026): भारत ने दुनिया का पहला 'ग्रीन अमोनिया' निर्यातक बनकर ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी धाक जमा ली है। गुजरात के कांडला बंदरगाह से जर्मनी के लिए भेजी गई पहली खेप भारत के 'राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन' की सफलता का प्रमाण है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • शून्य कार्बन उत्सर्जन: यह अमोनिया पूरी तरह सौर और पवन ऊर्जा के जरिए बनाई गई है। इसके उत्पादन में कोयले या गैस का उपयोग नहीं हुआ है, जिससे यह दुनिया का सबसे शुद्ध ईंधन माना जा रहा है।

  • यूरोपीय बाजारों में मांग: यूरोप अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अब भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहा है। भारत ने जापान और सिंगापुर के साथ भी इसी तरह के निर्यात समझौते किए हैं।

  • आर्थिक लाभ: हरित ऊर्जा निर्यात से भारत को हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा मिलेगी। इससे भारत का व्यापार घाटा (Trade Deficit) कम करने में मदद मिलेगी।

  • अमोनिया का भविष्य: इसका उपयोग बड़े जहाजों को चलाने (Shipping Fuel) और उर्वरक (Fertilizer) उद्योग में कार्बन मुक्त उत्पादन के लिए किया जाएगा।

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