डिजिटल लोन लेने वालों के लिए 'कवच': आरबीआई (RBI) के नए नियम लागू; 3-5 दिन का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' और छिपे हुए शुल्कों पर पूर्ण रोक
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डिजिटल लोन लेने वालों के लिए 'कवच': आरबीआई (RBI) के नए नियम लागू; 3-5 दिन का 'कूलिंग-ऑफ पीरियड' और छिपे हुए शुल्कों पर पूर्ण रोक

12, 2, 2026

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मुंबई (4 अप्रैल 2026): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेंडिंग ऐप्स के जरिए होने वाली धोखाधड़ी और उत्पीड़न को रोकने के लिए 'डिजिटल लेंडिंग गाइडलइन्स 2026' को पूरी तरह लागू कर दिया है। ये नियम ग्राहकों को ऋण जाल से बचाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए हैं।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • कूलिंग-ऑफ पीरियड: अब लंबी अवधि का लोन लेने वाले ग्राहकों के पास 3 से 5 दिन का एक 'एग्जिट विंडो' होगा। इस दौरान वे बिना किसी जुर्माने (Penalty) के लोन समझौता रद्द कर सकते हैं। उन्हें केवल मूलधन और उस अवधि का ब्याज चुकाना होगा।

  • APR और KFS अनिवार्य: बैंकों और एनबीएफसी को अब 'की फैक्ट स्टेटमेंट' (KFS) देना अनिवार्य होगा, जिसमें एनुअल पर्सेंटेज रेट (APR) का उल्लेख होगा। यदि कोई शुल्क केएफएस में नहीं लिखा है, तो बैंक उसे वसूल नहीं कर सकेगा।

  • वसूली एजेंटों पर नकेल: आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि रिकवरी एजेंट केवल निर्धारित घंटों में ही संपर्क कर सकते हैं। वे ग्राहकों के कार्यस्थल पर नहीं जा सकते और न ही उनके परिवार को परेशान कर सकते हैं। ऐसा करने पर बैंक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज हो सकता है।

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