सुस्त लॉजिस्टिक्स से रिटेल सेक्टर को भारी चोट: भारत के संगठित खुदरा क्षेत्र को हर साल ₹2,000 करोड़ का नुकसान; 'क्लिकपोस्ट' की रिपोर्ट में खुलासा
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सुस्त लॉजिस्टिक्स से रिटेल सेक्टर को भारी चोट: भारत के संगठित खुदरा क्षेत्र को हर साल ₹2,000 करोड़ का नुकसान; 'क्लिकपोस्ट' की रिपोर्ट में खुलासा

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): जहाँ एक ओर ग्राहकों तक डिलीवरी की गति बढ़ी है, वहीं दुकानों और गोदामों के बीच होने वाला आंतरिक माल परिवहन (Internal Logistics) अभी भी पिछड़ा हुआ है। 'क्लिकपोस्ट' की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पुरानी तकनीक और मैन्युअल सिस्टम के कारण भारतीय रिटेल सेक्टर सालाना ₹2,000 करोड़ गंवा रहा है।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • पूंजी का फंसना: रिपोर्ट के अनुसार, 85% रिटेल ब्रांड अभी भी ईमेल और स्प्रेडशीट जैसे मैन्युअल सिस्टम का उपयोग कर रहे हैं। इससे इन्वेंट्री ट्रांसफर में देरी होती है, जिससे वर्किंग कैपिटल फंस जाती है। उदाहरण के लिए, एक फैशन रिटेलर की इन्वेंट्री रिटर्न का समय 1 दिन से बढ़कर 13 दिन हो गया, जिससे ₹2.6 करोड़ की पूंजी ब्लॉक हो गई।

  • टेक्नोलॉजी गैप: ऑटोमेटेड सिस्टम के जरिए 90% पिकअप पहले प्रयास में सफल होते हैं, जबकि मैन्युअल तरीके में यह आंकड़ा मात्र 30-40% है।

  • बिक्री पर असर: बिलिंग और इनवॉइस की गलतियों के कारण पीक सीजन के दौरान रिटेलर्स की बिक्री में 8-12% की गिरावट देखी गई है।

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