डिजिटल भुगतान में सुरक्षा का 'नया युग': 1 अप्रैल से UPI और डिजिटल वॉलेट के लिए 'टू-स्टेप वेरिफिकेशन' अनिवार्य; RBI ने धोखाधड़ी पर कसी नकेल
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डिजिटल भुगतान में सुरक्षा का 'नया युग': 1 अप्रैल से UPI और डिजिटल वॉलेट के लिए 'टू-स्टेप वेरिफिकेशन' अनिवार्य; RBI ने धोखाधड़ी पर कसी नकेल

12, 2, 2026

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मुंबई (4 अप्रैल 2026): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल लेन-देन को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए 1 अप्रैल 2026 से नए कड़े नियम लागू कर दिए हैं। अब केवल ओटीपी (OTP) के भरोसे लेन-देन नहीं होगा; ग्राहकों को सुरक्षा के लिए दो-चरणीय सत्यापन (Two-step Verification) की प्रक्रिया से गुजरना होगा।

मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:

  • सुरक्षा प्रोटोकॉल: नए नियमों के तहत अब बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट या फेस आईडी) या पिन के साथ ओटीपी का संयोजन अनिवार्य कर दिया गया है। इससे 'सिम-स्वैपिंग' और 'फिशिंग' जैसी धोखाधड़ी की घटनाओं में 60% तक की कमी आने की उम्मीद है।

  • ई-रुपया (CBDC) अपडेट: आरबीआई का डिजिटल रुपया (e₹) अब पायलट मोड से निकलकर व्यापक विस्तार की ओर है। अब इसे ऑफलाइन मोड में भी उपयोग करने के परीक्षण सफल रहे हैं, जिससे बिना इंटरनेट वाले इलाकों में भी डिजिटल भुगतान संभव होगा।

  • उपयोगकर्ता अनुभव: हालांकि इन सुरक्षा चरणों से भुगतान की गति में कुछ सेकंड्स की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन आरबीआई का मानना है कि 'सुरक्षित बैंकिंग' ही भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था की नींव है।

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