ईरान-अमेरिका संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया: 'मिसाइल वार' के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित; खाड़ी देशों से लौटने वाले जहाजों का रास्ता बदला
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ईरान-अमेरिका संघर्ष से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया: 'मिसाइल वार' के बाद कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित; खाड़ी देशों से लौटने वाले जहाजों का रास्ता बदला

12, 2, 2026

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तेहरान/वॉशिंगटन (4 अप्रैल 2026): पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। शुक्रवार रात ईरान द्वारा दो अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराने के दावे के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव चरम पर है। इस क्षेत्र से होने वाली वैश्विक कच्चे तेल की 20% आपूर्ति अब सीधे खतरे में है।

विस्तृत विश्लेषण:

  • शिपिंग रूट में बदलाव: सुरक्षा कारणों से एयर इंडिया और कई अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने अपने रूट बदल लिए हैं। ईरान और ओमान के बीच समुद्री मार्ग में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही 40% तक कम हो गई है। भारतीय रिफाइनरियों ने भी अब वैकल्पिक रूप से रूसी और अफ्रीकी तेल की ओर रुख करना शुरू कर दिया है।

  • भारत पर प्रभाव: भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है। यदि यह तनाव हफ़्तों तक जारी रहा, तो घरेलू स्तर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹10-15 की बढ़ोत्तरी की आशंका है। सरकार ने फिलहाल 'रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व' (Strategic Petroleum Reserve) से आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।

  • कूटनीतिक गतिरोध: वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता विफल हो गई है क्योंकि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों से सीधे मिलने से इनकार कर दिया है।

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