6G की रेस में भारत सबसे आगे: स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए 6 GHz बैंड की पहचान; रिलायंस जियो और एयरटेल ने शुरू किया 6G-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर
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6G की रेस में भारत सबसे आगे: स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए 6 GHz बैंड की पहचान; रिलायंस जियो और एयरटेल ने शुरू किया 6G-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): दूरसंचार विभाग (DoT) ने भारत के '6G विजन 2030' के तहत स्पेक्ट्रम नीलामी का नया रोडमैप तैयार कर लिया है। सरकार ने 6 GHz बैंड को विशेष रूप से अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी के लिए सुरक्षित करने का निर्णय लिया है।

विस्तृत विश्लेषण:

  • तकनीकी छलांग: 6G तकनीक वर्तमान 5G से 100 गुना अधिक तेज़ होगी। इससे होलोग्राफिक कॉलिंग और स्मार्ट सिटी का संचालन वास्तविक समय में संभव होगा। रिलायंस जियो और भारती एयरटेल ने अपने कोर-नेटवर्क को '6G रेडी' बनाने के लिए विदेशी कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है।

  • स्वदेशी पेटेंट: भारत अब तक 6G से संबंधित 200 से अधिक वैश्विक पेटेंट दर्ज कर चुका है। सरकार ने स्टार्टअप्स के लिए ₹2,000 करोड़ का 'नवाचार कोष' बनाया है ताकि 6G के हार्डवेयर का निर्माण भारत में ही हो सके।

  • लागत: नीलामी से सरकार को ₹3 लाख करोड़ से अधिक का राजस्व मिलने की उम्मीद है, जिसका उपयोग डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार में किया जाएगा।

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