भारत की 'ब्लू इकोनॉमी' को नई दिशा: 'मर्चेंट शिपिंग बिल 2026' और 'सागर संहिता' लागू; समुद्री डाकुओं और प्रदूषण पर नकेल कसने के कड़े प्रावधान
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भारत की 'ब्लू इकोनॉमी' को नई दिशा: 'मर्चेंट शिपिंग बिल 2026' और 'सागर संहिता' लागू; समुद्री डाकुओं और प्रदूषण पर नकेल कसने के कड़े प्रावधान

12, 2, 2026

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नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): भारत सरकार ने अपने समुद्री कानूनों में दशकों बाद सबसे बड़ा फेरबदल करते हुए 'मर्चेंट शिपिंग बिल 2026' और 'सागर संहिता' को आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया है। यह कदम भारत के 7,500 किमी लंबे तटरेखा और विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा और व्यावसायिक उपयोग को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए उठाया गया है।

विस्तृत विश्लेषण:

  • समुद्री सुरक्षा और पायरेसी: नए कानून के तहत भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड को अंतरराष्ट्रीय जल सीमा में समुद्री डाकुओं (Pirates) के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अधिक कानूनी शक्तियां दी गई हैं। अब पकड़े गए समुद्री अपराधियों पर भारतीय अदालतों में मुकदमा चलाना आसान होगा।

  • ग्रीन शिपिंग और प्रदूषण: जहाजों से होने वाले तेल रिसाव (Oil Spill) और समुद्री कचरे के लिए जुर्माने की राशि को 10 गुना बढ़ा दिया गया है। 'शिप रीसाइक्लिंग' के लिए अब अंतरराष्ट्रीय 'हांगकांग कन्वेंशन' के मानकों का पालन अनिवार्य होगा, जिससे भारत दुनिया का 'क्लीन शिप ब्रेकिंग हब' बनेगा।

  • नाविकों का कल्याण: भारतीय नाविकों के लिए कार्य दशाओं, बीमा और कानूनी सहायता के लिए एक नया 'मरीन वेलफेयर फंड' बनाया गया है। इससे विदेशी जहाजों पर काम करने वाले लाखों भारतीयों को सीधे तौर पर सरकारी सुरक्षा कवच मिलेगा।

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