अंतरिक्ष का 'कचरा' साफ करेगा भारत: इसरो (ISRO) के नेतृत्व में भारतीय स्टार्टअप को मिला वैश्विक मलबा हटाने का पहला ठेका; 'स्पेस सस्टेनेबिलिटी' में बढ़ी साख
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अंतरिक्ष का 'कचरा' साफ करेगा भारत: इसरो (ISRO) के नेतृत्व में भारतीय स्टार्टअप को मिला वैश्विक मलबा हटाने का पहला ठेका; 'स्पेस सस्टेनेबिलिटी' में बढ़ी साख

12, 2, 2026

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बेंगलुरु (4 अप्रैल 2026): अंतरिक्ष में जमा हो रहे पुराने उपग्रहों और मलबे (Space Junk) की समस्या से निपटने के लिए भारत अब दुनिया का 'क्लीनर' बनने जा रहा है। इसरो के सहयोग से एक भारतीय स्पेस स्टार्टअप को यूरोपीय संघ से अंतरिक्ष मलबे की मैपिंग और उसे हटाने का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय कॉन्ट्रैक्ट मिला है।

विस्तृत विश्लेषण:

  • नेत्र (NETRA) प्रोजेक्ट का विस्तार: इसरो ने अपने 'नेत्र' प्रोजेक्ट के तहत एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो अंतरिक्ष में तैरते सेंटीमीटर आकार के टुकड़ों को भी ट्रैक कर सकती है। अब भारतीय रोबोटिक सैटेलाइट्स इन टुकड़ों को पकड़कर पृथ्वी के वातावरण में जलाकर नष्ट करेंगे।

  • सुरक्षा का सवाल: अंतरिक्ष मलबे के कारण सक्रिय उपग्रहों (जैसे जीपीएस और संचार उपग्रह) के टकराने का खतरा 30% तक बढ़ गया है। भारत की यह सेवा अन्य देशों के उपग्रहों को 'सुरक्षित रास्ता' प्रदान करेगी।

  • नई इंडस्ट्री: भारत अब 'इन-ऑर्बिट सर्विसिंग' और 'स्पेस लॉजिस्टिक्स' के क्षेत्र में एक नया वैश्विक बाजार खड़ा कर रहा है, जिससे 2030 तक अरबों डॉलर का राजस्व मिलने की उम्मीद है।

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