पटरियों से ऊपर उड़कर चलेगी ट्रेन: भारत में 'मैग्लेव' (Maglev) तकनीक का पहला प्रायोगिक ट्रैक तैयार; 500 किमी/घंटा की गति से होगा सफर
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पटरियों से ऊपर उड़कर चलेगी ट्रेन: भारत में 'मैग्लेव' (Maglev) तकनीक का पहला प्रायोगिक ट्रैक तैयार; 500 किमी/घंटा की गति से होगा सफर

12, 2, 2026

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बेंगलुरु/चेन्नई (4 अप्रैल 2026): भारतीय इंजीनियरिंग ने एक और बड़ी छलांग लगाई है। मैग्नेटिक लेविटेशन (Maglev) तकनीक, जिसमें ट्रेन पटरियों को छुए बिना चुम्बकीय शक्ति से हवा में तैरते हुए चलती है, का पहला 10 किमी का प्रायोगिक ट्रैक बेंगलुरु के पास बनकर तैयार हो गया है। इसे आईआईटी मद्रास और भेल (BHEL) के सहयोग से विकसित किया गया है।

विस्तृत विश्लेषण:

  • अतुलनीय गति: चूंकि ट्रेन और पटरी के बीच घर्षण (Friction) नहीं होता, इसलिए यह ट्रेन 500-600 किमी/घंटा की गति आसानी से पकड़ सकती है। इससे दिल्ली से मुंबई का सफर मात्र 3 घंटे में संभव हो सकेगा।

  • कम रखरखाव: पटरियों के घिसने की समस्या न होने के कारण मैग्लेव ट्रेनों का रखरखाव बुलेट ट्रेन की तुलना में 40% सस्ता होता है। साथ ही, यह शोर रहित और पूरी तरह प्रदूषण मुक्त है।

  • मेक इन इंडिया: इस तकनीक का 90% हिस्सा स्वदेशी है, जिससे भारत अब उन गिने-चुने देशों में शामिल हो गया है जिनके पास मैग्लेव की अपनी तकनीक मौजूद है।

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