भारत में 'कंडोम' संकट की आहट: मिडिल-ईस्ट युद्ध से सप्लाई चेन ध्वस्त; कच्चे माल की कीमतों में 50% तक बढ़ोतरी की आशंका
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भारत में 'कंडोम' संकट की आहट: मिडिल-ईस्ट युद्ध से सप्लाई चेन ध्वस्त; कच्चे माल की कीमतों में 50% तक बढ़ोतरी की आशंका

12, 2, 2026

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1. उत्पादन लागत में भारी बढ़ोतरी (Input Cost Hike)

कंडोम निर्माण में उपयोग होने वाले पेट्रोलियम और केमिकल आधारित उत्पादों की कीमतों में अस्थिरता आ गई है:

  • अमोनिया: विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी कीमतों में 40-50% तक की वृद्धि हो सकती है।

  • सिलिकॉन ऑयल: इसकी कीमतों में पहले ही अत्यधिक उछाल देखा जा रहा है।

  • पैकेजिंग मटेरियल: पीवीसी फॉयल, एल्युमीनियम फॉयल और अन्य पैकेजिंग आइटम की कमी होने की पूरी संभावना है।

2. रसद और शिपिंग में देरी (Logistics Challenges)

वैश्विक युद्ध संकट के कारण समुद्री मार्गों में बदलाव करना पड़ रहा है:

  • ट्रांजिट टाइम: केप ऑफ गुड होप के रास्ते मार्ग परिवर्तन से माल पहुँचने में 15-20 दिन की अतिरिक्त देरी हो रही है।

  • कंटेनर की कमी: शिपिंग कंटेनरों की वैश्विक कमी के कारण विदेशी ग्राहकों और घरेलू बाजार तक माल पहुँचाना चुनौतीपूर्ण हो गया है।

  • ईंधन की मार: माल ढुलाई (Freight) की लागत बढ़ने से अंतिम उत्पाद की कीमत बढ़ना तय माना जा रहा है।


3. मांग और आपूर्ति का बिगड़ता संतुलन

कर्नाटक ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार, पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर आधारित कच्चे माल की कमी से न केवल कंडोम, बल्कि कई अन्य फार्मास्युटिकल उत्पादों के निर्माण पर भी असर पड़ सकता है।

  • नतीजा: यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो बाजार में स्टॉक कम होने लगेगा और डिमांड-सप्लाई गैप के कारण कीमतें आम आदमी की पहुंच से बाहर हो सकती हैं।

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