छत्तीसगढ़ में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत: पहले दिन की पूजा और भक्तों की भावनाएँ

छत्तीसगढ़ में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत: पहले दिन की पूजा और भक्तों की भावनाएँ

11, 8, 2025

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22 सितंबर 2025 को छत्तीसगढ़ में शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हुआ। इस दिन को लेकर मंदिरों में विशेष तैयारियाँ की गईं और श्रद्धालुओं ने विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की। मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है।


पूजा विधि और महत्व

नवरात्रि के पहले दिन विशेष रूप से घटस्थापना की जाती है। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा का महत्व है। माना जाता है कि इस दिन की पूजा से जीवन में सुख-समृद्धि और मानसिक शांति प्राप्त होती है। श्रद्धालुओं ने 'ॐ ऐं ह्लीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे' जैसे मंत्रों का जाप किया और मां की आराधना की।


भक्तों की भावनाएँ और उत्साह

मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई। लोगों ने पारंपरिक परिधानों में मां के दरबार में हाजिरी दी और आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दिन को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह और श्रद्धा देखने को मिली।


प्रशासन की भूमिका

प्रशासन ने इस अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई की विशेष व्यवस्था की थी। मंदिरों के आसपास ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया था। इसके अलावा, कोविड-19 के मद्देनजर सोशल डिस्टेंसिंग और मास्क पहनने की सलाह दी गई।


सामाजिक असर

शारदीय नवरात्रि का पर्व समाज में एकता और भाईचारे का प्रतीक है। इस दौरान लोग एक-दूसरे से मिलते हैं, खुशियाँ बाँटते हैं और सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना करते हैं। यह पर्व सामाजिक मेलजोल को बढ़ावा देता है और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।


निष्कर्ष

छत्तीसगढ़ में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत ने धार्मिक और सामाजिक उत्साह का वातावरण तैयार किया है। मां शैलपुत्री की पूजा ने लोगों को मानसिक शांति और समृद्धि की ओर अग्रसर किया है। प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं ने इस पर्व को और भी भव्य और सुरक्षित बनाया है। आशा है कि आने वाले दिनों में भी यह उत्साह और श्रद्धा बनी रहेगी।

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