छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता: 40-40 लाख के इनामी दो माओवादी ढेर
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छत्तीसगढ़ में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता: 40-40 लाख के इनामी दो माओवादी ढेर

11, 8, 2025

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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र में सोमवार को सुरक्षा बलों ने एक बड़ी सफलता हासिल की। यहां हुई मुठभेड़ में दो वरिष्ठ माओवादी नेता मारे गए, जिनकी पहचान राजू दादा उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी (63) और कोसा दादा उर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी (67) के रूप में हुई है। इन दोनों पर छत्तीसगढ़ सरकार ने 40-40 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था। यह मुठभेड़ माओवादी संगठन सीपीआई (माओवादी) के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई है। 


🧭 मुठभेड़ की शुरुआत

नारायणपुर पुलिस अधीक्षक राबिन्सन के अनुसार, सुरक्षा बलों को अबूझमाड़ क्षेत्र में माओवादियों की गतिविधियों की सूचना मिली थी। इसके बाद सोमवार सुबह से ही सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया। इस दौरान माओवादियों और सुरक्षा बलों के बीच रुक-रुक कर गोलाबारी हुई। अंततः दो वरिष्ठ माओवादी कैडरों के मारे जाने की पुष्टि हुई।


🔫 बरामद सामग्री

मुठभेड़ स्थल से सुरक्षा बलों ने एके-47 राइफल, इंसास राइफल, बैरल ग्रेनेड लांचर (BGL), भारी मात्रा में विस्फोटक, माओवादी साहित्य और अन्य दैनिक उपयोग की वस्तुएं जब्त की हैं। यह सामग्री माओवादी संगठन की सक्रियता और उनकी रणनीति को दर्शाती है।


🧠 माओवादी नेताओं की पृष्ठभूमि

राजू दादा और कोसा दादा दोनों दंडकारण्य विशेष क्षेत्रीय समिति में तीन दशकों से अधिक समय से सक्रिय थे। वे कई बड़ी हिंसक घटनाओं के मास्टरमाइंड रहे हैं, जिनमें कई जवान शहीद हुए और निर्दोष नागरिकों की जानें गईं। उनकी मुठभेड़ में मौत से माओवादी संगठन को एक बड़ा आघात पहुंचा है।


📉 माओवादी आंदोलन की दिशा

बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदररराज पी. ने इस सफलता को माओवादी संगठन के लिए बड़ा आघात बताया। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद पुलिस और सुरक्षा बल पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य कर रहे हैं। उन्होंने माओवादी कैडरों और उनके नेतृत्व से अपील की कि वे समझें कि अब माओवादी आंदोलन अपने अंत की ओर है। यह समय है कि वे हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटें और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं।


🕊️ निष्कर्ष

यह मुठभेड़ छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ सुरक्षा बलों की सक्रियता और सफलता को दर्शाती है। हालांकि यह माओवादी संगठन के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन यह भी स्पष्ट करता है कि माओवादी आंदोलन अब अपने अंत की ओर है। सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई और माओवादी कैडरों की आत्मसमर्पण की प्रक्रिया से उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान होगा।

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