छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है

24, 9, 2025

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छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसमें एक ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (BMO) को 44 महीने तक अनुपस्थित रहने के बावजूद लगभग ₹14 लाख की सैलरी मिली। यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को उजागर करता है।


🏥 मामला क्या है?

गरियाबंद जिले के एक सरकारी अस्पताल में तैनात BMO पिछले 44 महीनों से कार्यालय में अनुपस्थित थे। इसके बावजूद, उन्हें नियमित रूप से वेतन जारी किया जाता रहा, जिससे सरकारी खजाने पर ₹14 लाख से अधिक का बोझ पड़ा। यह राशि उस समय की है जब BMO को कार्यस्थल पर उपस्थित होना चाहिए था।


🔍 जांच और प्रशासनिक कार्रवाई

इस मामले की जानकारी मिलने के बाद, राज्य सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच में पाया कि BMO ने बिना किसी वैध कारण के लंबे समय तक अनुपस्थिति बनाई और इसके बावजूद वेतन प्राप्त किया। इस मामले में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।


⚠️ प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के संकेत

यह घटना प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के गंभीर संकेत देती है। यदि एक अधिकारी बिना काम किए वेतन प्राप्त कर सकता है, तो यह अन्य कर्मचारियों के लिए भी गलत संदेश भेजता है। ऐसी घटनाएं सरकारी संस्थाओं की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं और जनता के विश्वास को कमजोर करती हैं।


🛡️ भविष्य के लिए सुझाव

  • कड़ी निगरानी: सरकारी कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य की नियमित निगरानी की जानी चाहिए।

  • स्वचालित वेतन प्रणाली: वेतन वितरण प्रणाली को स्वचालित किया जाना चाहिए, ताकि अनुपस्थिति के बावजूद वेतन जारी न हो।

  • जवाबदेही: किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।


इस मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी संस्थाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना आवश्यक है। सरकार को चाहिए कि वह ऐसे मामलों की गंभीरता से जांच करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

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