छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन (CGMSC) के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।

छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन (CGMSC) के एक बड़े घोटाले का पर्दाफाश हुआ है।

24, 9, 2025

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रायपुर। छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विस कॉर्पोरेशन (CGMSC) पर बड़ा आरोप है कि उसने १०० करोड़ रुपये से अधिक की दवाइयाँ बिना टेंडर प्रक्रिया अपनाए ही खरीदीं। यह व्यवस्था इसलिए हुई क्योंकि नई दवाओं और उपकरणों की खरीद के लिए जारी की गई १६ निविदाएँ दो वर्षों से लंबित थीं।

निविदा प्रक्रिया ठप होने पर, CGMSC ने चुनिंदा कंपनियों को सीधे दवाइयाँ देने का रास्ता अपनाया। पिछले आठ महीनों में, दवाइयाँ उसी कंपनी से खरीदी गईं जिसकी पुरानी दर अनुबंध की अवधि समाप्त हो चुकी थी। यह कंपनी कई शिकायतों में दोषी पाई गई थी — गुणवत्ता जांच में उसकी दवाइयाँ फेल रही थीं — लेकिन इसके बावजूद उसे आगे आपूर्ति जारी रही।

अधिक चिंताजनक यह है कि कई सप्लायरों को उनकी आपूर्ति के बाद अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। ऐसे में दवाओं की विश्वसनीयता और उपलब्धता दोनों पर ही संकट खड़ा हो गया। अस्पतालों और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों को आवश्यक दवाइयाँ मिलने में बहुत देरी हुई या वे उपलब्ध ही नहीं हो पाईं।

इस मामले ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, जवाबदेही और सरकारी खरीद प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। जनता को भरोसा होना चाहिए कि उनके करों का उपयोग सही तरीके से हो रहा है, विशेषकर स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील क्षेत्र में।

रिपोर्ट में बताया गया है कि नई प्रबंधन टीम ने सुधार की दिशा में कदम उठाया है। लगभग दस से अधिक दवा निरीक्षकों की नियुक्ति की गई है, तथा लंबित निविदाओं को शीघ्र पूरा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

यदि ये सुधार सफल हो जाते हैं, तो यह घटना अन्य राज्यों के लिए उदाहरण बन सकती है। लेकिन वास्तविक सुधार तभी माने जाएंगे, जब दोषियों तक पहुँच हो और उन्हें सार्वजनिक रूप से जवाबदेह ठहराया जाए। तभी भविष्य में ऐसी अनियमितताएँ रोकी जा सकेंगी और जनता को भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।

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