NTPC के उप महाप्रबंधक रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, 16 लाख के मुआवजे के बदले मांगे थे 5 लाख रुपए
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NTPC के उप महाप्रबंधक रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार, 16 लाख के मुआवजे के बदले मांगे थे 5 लाख रुपए

11, 8, 2025

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रायगढ़। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB), बिलासपुर ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (NTPC) के उप महाप्रबंधक को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया है। आरोप है कि वह पुनर्वास मुआवजे के लिए सरकारी बकाया राशि की मांग में हद से अधिक रिश्वत मांग रहा था।

क्या हुआ था मामले में?

  • शिकायतकर्ता सौदागर गुप्ता ने बताया कि उनके तिलाईपाली गांव का मकान और जमीन NTPC द्वारा अधिग्रहित की गई थी। सरकार ने मुआवजे का भुगतान शुरू कर दिया था, लेकिन पुनर्वास के हिस्से में करीब 16 लाख रुपये बकाया थे। उस राशि के भुगतान के लिए उप महाप्रबंधक विजय दुबे ने 5 लाख रुपये रिश्वत की मांग की थी।

  • शिकायत में आगे उल्लेख है कि गुप्ता ने 50 हजार रुपये अग्रिम दिए थे और बाकी रकम की मांग की जा रही थी।

  • एसीबी की टीम ने औपचारिक वैरिफिकेशन के बाद दुबे को तिलाईपाली के पास रायकेरा-घरघोड़ा इलाके में 4.50 लाख रुपये लेते गिरफ्तार किया। ये रकम पूरी रिश्वत की मांग से थोड़ी कम है, लेकिन रंगे हाथों पकड़े जाने का सबूत है।

कानूनी मामला और प्रावधान

  • इस कार्रवाई के दौरान दुबे पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 (संशोधित अधिनियम 2018) के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस धारा के तहत दोषी पाए जाने पर तीन से सात साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।

  • एसीबी ने कहा है कि अग्रिम राशि भी ली गई थी और बाकी का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।

प्रभाव और समाज में प्रतिक्रिया

  • इलाके के लोगों में यह घटना चर्चा का विषय बनी हुई है। कई लोगों का कहना है कि सरकारी अधिकारियों से रिश्वत की शिकायत करना उनके लिए जोखिम भरा काम होता है, लेकिन इस तरह की कार्रवाईयाँ भरोसा जगाती हैं कि सिस्टम में कुछ सुधार हो रहे हैं।

  • उन लोगों को राहत महसूस होती है जो सरकारी जमीन-अधिकार, पुनर्वास तथा मुआवजा मामलों में अक्सर न्याय की कमी महसूस करते हैं।

भविष्य की कार्रवाई

  • जांच अब आगे बढ़ेगी। ACB आरोपियों के खिलाफ सबूत इकट्ठा करेगी — पेमेंट के रिकॉर्ड, बातचीत की रिकॉर्डिंग या गवाहों के बयान।

  • यदि मामला साबित हुआ, तो उप महाप्रबंधक को न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा और उन्हें सजा हो सकती है।

  • साथ ही सरकारी विभागों को यह सुनिश्चित करना होगा कि मुआवजे की प्रक्रिया पारदर्शी हो, दस्तावेज़ सही हों और शिकायतें समय पर सुनी जाएं।

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