नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): बदलती दुनिया के साथ भारत के कानूनों में भी बड़ा सुधार हुआ है। संसद ने 'डिजिटल इनहेरिटेंस बिल 2026' पारित कर दिया है, जो किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसकी डिजिटल संपत्तियों (जैसे क्रिप्टो करेंसी, एनएफटी, मुद्रीकृत यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट्स) के हस्तांतरण की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है।
विस्तृत विश्लेषण:
डिजिटल वसीयत: अब नागरिक अपनी भौतिक संपत्ति की तरह ही अपनी डिजिटल संपत्ति के लिए 'नॉमिनी' या वारिस नियुक्त कर सकेंगे। इसके लिए एक 'सेंट्रल डिजिटल रजिस्ट्री' बनाई गई है जहाँ वसीयत को एन्क्रिप्टेड रूप में स्टोर किया जा सकता है।
सोशल मीडिया अकाउंट्स: यदि किसी यूज़र ने वारिस नियुक्त किया है, तो उसकी मृत्यु के बाद परिवार को उस अकाउंट का एक्सेस (Access) मिलेगा ताकि वे उसे 'मेमोरियल' बना सकें या डेटा बैकअप ले सकें।
क्रिप्टो और वॉलेट: क्रिप्टो संपत्तियों के लिए कानून ने स्पष्ट किया है कि निजी चाबियाँ (Private Keys) साझा न होने की स्थिति में भी कानूनी वारिस अदालत के आदेश के जरिए एक्सचेंजों से फंड प्राप्त कर सकेंगे।
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