नयी दिल्ली/लुधियाना (4 अप्रैल 2026): भारत के लघु और मध्यम उद्योग (MSME) अब पारंपरिक मशीनों की जगह 'इंडस्ट्री 4.0' तकनीक अपना रहे हैं। विशेषकर ऑटोमोबाइल और एयरोस्पेस क्षेत्र के जटिल पुर्जे अब छोटे शहरों की यूनिट्स में 3D प्रिंटिंग के जरिए तैयार हो रहे हैं।
मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण:
डिजाइन में लचीलापन: 3D प्रिंटिंग के कारण अब एमएसएमई बिना बड़े निवेश के कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स बना रहे हैं। पहले जिस सांचे (Mold) को बनाने में महीने लगते थे, अब वह मात्र 24 घंटे में प्रिंट हो रहा है।
लागत में कमी: कचरे (Scrap) का उत्पादन 90% कम हो गया है, क्योंकि 3D प्रिंटिंग में केवल उतना ही माल उपयोग होता है जितना पुर्जा बनाने के लिए जरूरी है।
ग्लोबल सप्लाई चेन: लुधियाना और कोयंबटूर के छोटे कारखाने अब बोइंग (Boeing) और टेस्ला (Tesla) जैसी कंपनियों को स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति कर रहे हैं, जिससे भारत की 'मेक इन इंडिया' साख मजबूत हुई है।
सरकारी प्रोत्साहन: 'डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग' अपनाने वाले एमएसएमई को ब्याज में 5% की अतिरिक्त छूट और मुफ्त तकनीकी ऑडिट की सुविधा दी जा रही है।
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