जम्मू/कठुआ: जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवाद विरोधी अभियान को और धार देने के लिए सेना ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। राइजिंग स्टार कोर (Rising Star Corps) के जीओसी ने बुधवार को मछेड़ी सेक्टर का दौरा कर अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों की युद्ध तत्परता का जायजा लिया।
दौरे के मुख्य बिंदु और रणनीतिक महत्व:
परिचालन तैयारियों की समीक्षा: जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) ने मछेड़ी और बानी के ऊँचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के साथ बातचीत की और उनकी 'कॉम्बैट रेडीनेस' (Combat Readiness) को परखा।
घुसपैठ का मार्ग: सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मछेड़ी सेक्टर का उपयोग आतंकी अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ कर डोडा, उधमपुर और किश्तवाड़ के जंगलों तक पहुँचने के लिए करते रहे हैं। पिछले दो वर्षों में इस क्षेत्र में हुई मुठभेड़ों के बाद यहाँ सुरक्षा घेरा और कड़ा किया गया है।
अतिरिक्त तैनाती: पिछले वर्ष की घटनाओं से सबक लेते हुए, भारतीय सेना ने इस दुर्गम इलाके में अपनी कई अतिरिक्त कंपनियों (Companies) को स्थायी रूप से तैनात किया है ताकि पर्वतीय रास्तों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके।
सैनिकों का मनोबल और सराहना:
रक्षा पीआरओ (जम्मू) के अनुसार, सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने विषम परिस्थितियों और कठिन भौगोलिक क्षेत्र में तैनात जवानों के उच्च मनोबल और अटूट प्रतिबद्धता की सराहना की। जीओसी ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि या घुसपैठ के प्रयास का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए बल पूरी तरह सक्षम है।
चुनौतियां और वर्तमान स्थिति:
भौगोलिक स्थिति: बानी-मछेड़ी का क्षेत्र घने जंगलों और ऊँचे पहाड़ों से घिरा है, जो प्राकृतिक रूप से छिपने के ठिकाने प्रदान करता है।
आतंकवाद विरोधी ग्रिड: हाल के महीनों में डोडा और कठुआ के ऊपरी इलाकों में बढ़ी गतिविधियों को देखते हुए सेना, पुलिस और सीआरपीएफ (CRPF) के बीच बेहतर समन्वय (Synergy) सुनिश्चित की जा रही है।
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