कोरबा। छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। लेमरू थाना क्षेत्र की एक नाबालिग छात्रा, जिसे परिजन 'पेट दर्द' समझकर अस्पताल ले गए थे, वह गर्भवती निकली। अस्पताल में उपचार के दौरान नाबालिग ने एक मृत नवजात को जन्म दिया। इस खुलासे के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए दुष्कर्म के आरोपी युवक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
पेट दर्द से शुरू हुआ खुलासा
घटना की शुरुआत रविवार देर रात हुई, जब पीड़िता को अचानक पेट में असहनीय दर्द शुरू हुआ। पूरी रात तड़पने के बाद सोमवार सुबह उसकी मां उसे इलाज के लिए जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंची।
डॉक्टरों की जांच: जब डॉक्टरों ने प्रारंभिक परीक्षण किया, तो वे हैरान रह गए। जांच में पता चला कि नाबालिग पूर्ण अवधि (Full-term) की गर्भवती है और उसे प्रसव पीड़ा (Labor Pain) हो रही है।
दवा का असर: पूछताछ में नाबालिग ने बताया कि दो दिन पहले उसने साधारण दर्द निवारक दवा खाई थी, जिसके बाद उसकी स्थिति बिगड़ गई और प्रसव प्रक्रिया शुरू हो गई।
अस्पताल में प्रसव और पुलिस की एंट्री
अस्पताल में भर्ती होने के कुछ ही समय बाद नाबालिग ने एक नवजात को जन्म दिया, लेकिन वह मृत पैदा हुआ। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल इसकी सूचना पुलिस और सखी सेंटर को दी।
बयान और एफआईआर: होश आने पर नाबालिग ने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके आधार पर लेमरू पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ दुष्कर्म (धारा 376) और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज किया।
आरोपी गिरफ्तार, भेजा गया जेल
पुलिस ने त्वरित जांच करते हुए गांव के ही एक युवक को चिन्हित किया, जिसने शादी का झांसा देकर नाबालिग के साथ शारीरिक संबंध बनाए थे।
गिरफ्तारी: पुलिस ने आरोपी को घेराबंदी कर पकड़ा और कड़ाई से पूछताछ की, जिसमें उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
कानूनी कार्रवाई: आरोपी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
जागरूकता का अभाव और सामाजिक चिंता
यह घटना दर्शाती है कि ग्रामीण अंचलों में आज भी स्वास्थ्य और यौन शिक्षा को लेकर भारी कमी है। 9 महीने तक गर्भ की जानकारी परिजनों को न होना और अंतिम समय में इसे 'साधारण पेट दर्द' समझना एक बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है। सखी सेंटर और महिला बाल विकास विभाग अब पीड़िता की काउंसलिंग कर रहे हैं।
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