1. देशी शराब: राहत और 'राउंड ऑफ' का गणित
कीमतें यथावत: डिस्टिलरी कंपनियों ने इस साल रेट कोट पिछले साल की तुलना में कम दिया है। सरकार को एक पेटी पर ₹75 की बचत होगी।
उपभोक्ता को लाभ क्यों नहीं? सरकार ने इस बचत का लाभ 'राउंड ऑफ प्राइस' (कीमत को पूर्णांक में रखने) के जरिए अपने पास रखने का निर्णय लिया है।
राजस्व: जानकारों के मुताबिक, केवल इस 'राउंड ऑफ' फार्मूले से प्रदेश सरकार को करीब ₹1300 करोड़ की अतिरिक्त कमाई होने की उम्मीद है।
2. विदेशी और प्रीमियम शराब: 'जितनी महंगी, उतना टैक्स'
स्लैब आधारित ड्यूटी: नई अधिसूचना के अनुसार, अब शराब की कीमत के आधार पर ड्यूटी तय होगी।
प्रीमियम ब्रांड्स: हाई-एंड और लग्जरी ब्रांड्स पर ड्यूटी बढ़ा दी गई है, जिससे विदेशी शराब की कीमतों में इजाफा होना तय है।
बीयर और RTD: बीयर और 'रेडी-टू-ड्रिंक' पेय पदार्थों पर भी संशोधित (बढ़ी हुई) दरें लागू होंगी।
3. कड़े नियम और सेना को राहत
एडवांस ड्यूटी: अब शराब की सप्लाई से पहले ही ड्यूटी टैक्स का भुगतान अनिवार्य कर दिया गया है। बिना टैक्स चुकाए शराब दुकान तक नहीं पहुँचेगी।
डिफेंस कोटा: सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए न्यूनतम ड्यूटी दरें तय की गई हैं, ताकि उन्हें वाजिब दामों पर आपूर्ति मिलती रहे।
अहाता और बार नीति: नई नीति में दुकानों के संचालन और अहातों (शराब पीने के स्थान) के लिए कड़े मापदंड तय किए गए हैं।
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