दीपक बैज के गंभीर आरोप:
पीसीसी चीफ दीपक बैज ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आबकारी विभाग (Excise Department) में मैनपावर सप्लाई के टेंडर को लेकर सीधा हमला बोला है:
एटीएम (ATM) का आरोप: बैज ने कहा कि "डबल इंजन" की आड़ में बीजेपी छत्तीसगढ़ के संसाधनों का उपयोग राजनीतिक फंडिंग के लिए कर रही है।
₹300 करोड़ का टेंडर: आरोप है कि मैनपावर सप्लाई के बड़े टेंडर में नियमों को ताक पर रखकर गुजरात के एक बीजेपी नेता से जुड़ी कंपनियों को लाभ पहुँचाया गया।
नियमों का उल्लंघन: बैज का दावा है कि SIS कैश सर्विसेस और डस्टर टोटल सॉल्यूशन का मालिक एक ही है, जबकि टेंडर की शर्तों के अनुसार एक ही प्रमोटर की दो कंपनियां भाग नहीं ले सकतीं। उन्होंने ईडी (ED) और ईओडब्ल्यू (EOW) से इसकी जांच की मांग की है।
सरकार का कड़ा पलटवार:
कांग्रेस के आरोपों पर प्रदेश के कद्दावर मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मोर्चा संभाला और तंज कसते हुए कहा:
भूपेश सरकार का इतिहास: जायसवाल ने कहा कि "बैज अभी भी पिछली सरकार के उस दौर को नहीं भूले हैं जब छत्तीसगढ़ को '10 जनपथ' का एटीएम बना दिया गया था।"
सुशासन का दावा: सरकार का तर्क है कि वर्तमान में सभी प्रक्रियाएं पारदर्शी हैं और कांग्रेस केवल हार की हताशा में आधारहीन आरोप लगा रही है।
विवाद के केंद्र में मुख्य सवाल:
इस राजनीतिक घमासान के बीच कुछ मौलिक सवाल जनता के मन में हैं:
साक्ष्य की उपलब्धता: क्या विपक्ष (कांग्रेस) इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए दस्तावेजी प्रमाण या कोर्ट में याचिका दायर करेगा?
नियमों की व्याख्या: क्या वाकई टेंडर प्रक्रिया में 'सिंगल ओनरशिप' (Single Ownership) के क्लॉज का उल्लंघन हुआ है?
जांच की निष्पक्षता: क्या राज्य की जांच एजेंसियां सत्तापक्ष से जुड़े इन आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेंगी?
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