जम्मू: केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने युवाओं को वैश्विक बौद्धिक और नैतिक चेतना का वाहक बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत की नींव केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि हमारे प्राचीन ज्ञान और मानवीय मूल्यों पर टिकी होगी।
प्रमुख घोषणाएं और संबोधन के मुख्य बिंदु:
परिसर का नया नाम: उपराज्यपाल ने विश्वविद्यालय के जम्मू परिसर का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर' करने की घोषणा की। महाराजा रणबीर सिंह को जम्मू-कश्मीर में शिक्षा और संस्कृति के संरक्षक के रूप में जाना जाता है।
संस्कृत और वेदों को प्रोत्साहन: क्षेत्र में पारंपरिक शिक्षा को पुनर्जीवित करने के लिए एलजी ने गुरुकुल, संस्कृत पाठशालाओं और वेद पाठशालाओं की स्थापना हेतु पूर्ण वित्तीय सहायता देने का बड़ा आश्वासन दिया है।
वैश्विक नेतृत्व (Global Leadership): सिन्हा ने कहा कि आज की संघर्षपूर्ण दुनिया को शांति का मार्ग दिखाने के लिए भारत को अपना ऐतिहासिक स्थान पुनः प्राप्त करना होगा। उन्होंने "वसुधैव कुटुंबकम्" की भावना को प्रज्वलित करने पर जोर दिया।
युवाओं की भूमिका: उपराज्यपाल के अनुसार, सशक्त भारत वही है जो देशों को 'अटूट एकता' में जोड़ सके। उन्होंने युवाओं से केवल करियर तक सीमित न रहकर वैश्विक कल्याण के लिए कार्य करने का आह्वान किया।
सांस्कृतिक महत्व:
महाराजा रणबीर सिंह (डोगरा राजवंश के दूसरे शासक) ने अपने शासनकाल में संस्कृत पांडुलिपियों के संरक्षण और अनुवाद के लिए अभूतपूर्व कार्य किए थे। उनके नाम पर विश्वविद्यालय परिसर का नामकरण जम्मू की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
निष्कर्ष:
एलजी मनोज सिन्हा का यह कदम जम्मू-कश्मीर को न केवल प्रशासनिक रूप से बल्कि शैक्षणिक और आध्यात्मिक रूप से भी मुख्यधारा से जोड़ने की कोशिश है। संस्कृत और पारंपरिक शिक्षा के लिए वित्तीय मदद का वादा आने वाले समय में घाटी और जम्मू संभाग में बौद्धिक क्रांति का आधार बन सकता है।
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