जयपुर: चैत्र शुक्ल तृतीया के अवसर पर निकली गणगौर माता की सवारी ने न केवल स्थानीय निवासियों बल्कि सात समंदर पार से आए पर्यटकों को भी मंत्रमुग्ध कर दिया।
आयोजन की मुख्य विशेषताएं:
शाही परंपरा: सवारी की शुरुआत ऐतिहासिक त्रिपोलिया गेट से हुई। पूर्व राजपरिवार से जुड़े पुजारियों ने विधि-विधान से माता की आरती की, जिसके बाद स्वर्ण और रजत जड़ित पालकी में मां गणगौर नगर भ्रमण पर निकलीं।
आसमान से स्वागत: इस वर्ष उत्सव को और भव्य बनाने के लिए पूरी शोभायात्रा पर हेलीकॉप्टर से फूलों की वर्षा की गई, जो दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र रहा।
लोक संस्कृति का संगम: राज्यभर से आए कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। सड़कों पर घूमर, कालबेलिया, कच्छी घोड़ी, गैर और चरी नृत्य की प्रस्तुतियों ने राजस्थान की समृद्ध विरासत को दर्शाया।
डिजिटल कनेक्टिविटी: इस बार सात समंदर पार बैठे राजस्थानियों को भी उत्सव से जोड़ा गया। 'राजस्थान फाउंडेशन' और पर्यटन विभाग ने सोशल मीडिया पर इस शाही सवारी की लाइव स्ट्रीमिंग की।
सुरक्षा और व्यवस्था:
भीड़ नियंत्रण: भारी जनसमुदाय को देखते हुए पुलिस प्रशासन मुस्तैद रहा।
इन्फ्लुएंसर पर लगाम: व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने उन 'सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर' को हटाया जो शोभायात्रा के बीच में आकर वीडियो बना रहे थे और सुरक्षा में बाधा डाल रहे थे।
सांस्कृतिक महत्व:
पर्यटन विभाग के उप निदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि गणगौर केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि वैवाहिक सुख और शिव-पार्वती के प्रति अटूट आस्था का प्रतीक है। यह आयोजन जयपुर की वैश्विक पहचान को और सुदृढ़ करता है।
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