जयपुर: राजस्थान की राजधानी में साइबर अपराधियों ने एक बार फिर 'डिजिटल अरेस्ट' के जरिए बड़ी वारदात को अंजाम दिया है। पुरानी बस्ती निवासी गायत्री मेडतवाल को ठगों ने करीब दो सप्ताह तक मनोवैज्ञानिक दबाव में रखा और अंततः उनसे 8 लाख रुपये ऐंठ लिए। नाहरगढ़ थाना पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैसे बुना गया 'डिजिटल अरेस्ट' का जाल?

  • फर्जी पहचान और डरावना आरोप: 6 मार्च को पीड़ित महिला को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को लालकोठी थाने का अधिकारी और मुंबई मुख्यालय का निरीक्षक 'प्रेम' बताया। ठगों ने आरोप लगाया कि महिला का नाम जम्मू-कश्मीर में हुए एक आतंकी हमले और पाकिस्तान को सूचना भेजने की संदिग्ध गतिविधियों में आया है।

  • मनोवैज्ञानिक दबाव: ठगों ने महिला को धमकी दी कि यदि उसने यह बात किसी को बताई तो उसे फांसी हो सकती है। पीड़ित को घंटों तक वीडियो कॉल पर रहने को मजबूर किया गया, जिसे 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जाता है।

  • लेनदेन का झांसा: जब महिला बुरी तरह डर गई, तो ठगों ने "मामला रफा-दफा" करने और नाम हटाने के बदले 8 लाख रुपये की मांग की। डर के मारे महिला ने यह बड़ी रकम जालसाजों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दी।

  • देर से हुआ अहसास: काफी समय बाद जब महिला को ठगी का अहसास हुआ, तब उन्होंने पुलिस से संपर्क किया।

सावधान! क्या है 'डिजिटल अरेस्ट'?

साइबर ठग पुलिस, सीबीआई (CBI) या नारकोटिक्स विभाग के अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करते हैं। वे आपको किसी अपराध (ड्रग्स, मनी लॉन्ड्रिंग या आतंकी गतिविधि) में फंसाने का डर दिखाते हैं और आपको कैमरे के सामने बैठे रहने को मजबूर करते हैं। वे असली दिखने वाले 'अरेस्ट वारंट' भी दिखाते हैं, जो पूरी तरह फर्जी होते हैं।


सुरक्षा के लिए 5 जरूरी बातें:

  1. पुलिस कभी वीडियो कॉल नहीं करती: कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी व्हाट्सएप या स्काइप पर वीडियो कॉल करके 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करता।

  2. गोपनीयता का दबाव: यदि कोई कहे कि "किसी को मत बताना वरना जेल जाओगे", तो समझ लीजिए वह ठग है। तुरंत अपने परिवार या दोस्तों को बताएं।

  3. पैसे की मांग: कानून के अनुसार, पुलिस फोन पर पैसे लेकर मामला खत्म करने का प्रस्ताव कभी नहीं देती।

  4. सत्यापन करें: कॉल आने पर घबराने के बजाय फोन काटें और खुद नजदीकी थाने जाकर या आधिकारिक नंबर पर कॉल कर जानकारी लें।

  5. हेल्पलाइन: ऐसी किसी भी स्थिति में तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट करें।

Powered by Froala Editor