नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): आधुनिक युद्धक्षेत्र अब केवल सीमाओं तक सीमित नहीं है। भारत ने अपनी रक्षा प्रणाली को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करते हुए 'प्रेडिक्टिव साइबर डिफेंस यूनिट' (PCDU) को सक्रिय कर दिया है। यह इकाई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके बिजली ग्रिड, बैंकिंग नेटवर्क और परमाणु संयंत्रों पर होने वाले संभावित साइबर हमलों की भविष्यवाणी करने और उन्हें विफल करने में सक्षम है।

विस्तृत विश्लेषण:

  • सक्रिय सुरक्षा (Proactive Strike): यह यूनिट केवल हमले को रोकती नहीं है, बल्कि 'हनीपोट्स' (Honeypots) तकनीक के जरिए हमलावरों की पहचान करती है और उनके सर्वर को निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है। पिछले 24 घंटों में इस यूनिट ने पावर ग्रिड पर होने वाले 5,000 से अधिक संदिग्ध 'बॉटनेट' हमलों को सफलतापूर्वक नाकाम किया है।

  • स्वदेशी फायरवॉल: भारत अब अपना खुद का 'ऑपरेटिंग सिस्टम' (Maya OS) और एन्क्रिप्शन स्टैंडर्ड्स इस्तेमाल कर रहा है, जिससे विदेशी चिप्स में छिपे 'बैकडोर' का खतरा खत्म हो गया है।

  • साइबर वारियर्स: सेना ने अब 'डिजिटल सोल्जर्स' की भर्ती शुरू की है, जिन्हें कोडिंग और डेटा फॉरेंसिक में विशेष महारत हासिल है। इनका मुख्य कार्य देश के 'डिजिटल डेटा' को बाहरी हस्तक्षेप से सुरक्षित रखना है।

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