धर्मपुरी (2 अप्रैल 2026): विपक्ष के नेता पलानीस्वामी ने मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के 'द्रविड़ मॉडल' को पूरी तरह से विफल बताते हुए इसे केवल "विज्ञापनों की सरकार" करार दिया।
1. सुरक्षा पर सवाल: पॉक्सो (POCSO) मामलों का आंकड़ा
पलानीस्वामी ने विधानसभा में सामाजिक कल्याण मंत्री पी. गीता जीवन के ही एक बयान को हथियार बनाते हुए सरकार को घेरा:
18,000 मामले: EPS ने दावा किया कि सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि राज्य में लगभग 18,000 पॉक्सो मामले दर्ज हुए हैं।
कानून-व्यवस्था: उन्होंने तर्क दिया कि पीड़ितों को दिया जा रहा मुआवजा अपराधों की उच्च संख्या की पुष्टि करता है, जो राज्य में बच्चों की सुरक्षा के प्रति सरकार की विफलता को दर्शाता है।
2. आर्थिक बोझ और "कर्जदार तमिलनाडु":
पलानीस्वामी ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए जनता के सामने कुछ आंकड़े रखे:
बिजली दरों में वृद्धि: उन्होंने आरोप लगाया कि द्रमुक के शासनकाल में बिजली की दरों में 67 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम आदमी की कमर टूट गई है।
बढ़ता कर्ज: EPS के अनुसार, तमिलनाडु आज देश के सबसे अधिक कर्ज वाले राज्यों की सूची में शीर्ष पर है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए खतरनाक है।
द्रविड़ मॉडल पर कटाक्ष: उन्होंने 'द्रविड़ मॉडल' को एक दिखावा बताते हुए कहा कि यह राज्य की वित्तीय सेहत के लिए "हानिकारक" साबित हुआ है।
3. चुनावी अपील (Tamil Nadu Polls 2026):
| मुद्दा | अन्नाद्रमुक (EPS) का स्टैंड |
| जन सुरक्षा | सरकार बच्चों और महिलाओं को सुरक्षा देने में पूरी तरह अक्षम रही है। |
| महंगाई | बिजली और संपत्ति कर में वृद्धि ने जनता का जीना मुहाल कर दिया है। |
| भ्रष्टाचार | सरकारी ठेकों और प्रशासन में पारदर्शिता का अभाव है। |
निष्कर्ष:
धर्मपुरी में पलानीस्वामी का यह कड़ा रुख दर्शाता है कि आगामी 23 अप्रैल के मतदान के लिए अन्नाद्रमुक ने 'सुरक्षा' और 'अर्थव्यवस्था' को अपना मुख्य चुनावी मुद्दा बना लिया है। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे इस सरकार को उखाड़ फेंकें ताकि राज्य को फिर से विकास और सुरक्षा की पटरी पर लाया जा सके
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