नयी दिल्ली (4 अप्रैल 2026): भारतीय न्यायपालिका ने तकनीक को अपनाते हुए दुनिया का सबसे बड़ा 'ई-कोर्ट्स फेज-3' प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स ने अब छोटे दीवानी मामलों और ट्रैफिक चालान जैसे विवादों को निपटाने के लिए एआई-आधारित 'स्मार्ट एल्गोरिदम' का उपयोग शुरू किया है।

विस्तृत विश्लेषण:

  • त्वरित न्याय: ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन और चेक बाउंस (Section 138) जैसे सरल मामलों में एआई अब दस्तावेजों का विश्लेषण कर प्रारंभिक फैसले (Judgments) तैयार कर रहा है, जिसे मानव जज केवल सत्यापित करेंगे। इससे जजों का बहुमूल्य समय बचेगा।

  • पेपरलेस और वर्चुअल: अब गवाहों के बयान और वकीलों की बहस वीआर (VR) और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हो रही है। मुकदमों की सभी फाइलें 'क्लाउड' पर सुरक्षित हैं, जिससे 'तारीख पर तारीख' वाली समस्या कम हो रही है।

  • डेटा सुरक्षा: सरकार ने न्यायपालिका के लिए एक समर्पित 'ज्यूडिशियल क्लाउड' बनाया है, जो पूरी तरह से एन्क्रिप्टेड है और साइबर हमलों से सुरक्षित है।

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