बीजापुर: प्राप्त जानकारी के अनुसार, तीनों छात्राओं का गर्भ लगभग 5 महीने का है। इनमें से दो छात्राएं नाबालिग हैं, जो इस मामले को कानूनी रूप से और भी गंभीर (POCSO एक्ट के दायरे में) बनाता है।
1. स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल:
सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन छात्राओं के लिए 'गर्भवती कार्ड' (MCH Card) पहले ही जारी कर दिए गए थे।
जानकारी का अभाव: यदि स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी थी और कार्ड बनाए गए थे, तो क्या उन्होंने इसकी सूचना पुलिस या जिला प्रशासन को दी?
अधीक्षिका का बयान: छात्रावास की अधीक्षिका ने इस पूरी स्थिति से अनभिज्ञता जताई है, जो कि हॉस्टल प्रबंधन की भारी लापरवाही की ओर इशारा करता है।
2. सुरक्षा और निगरानी में चूक:
हॉस्टल परिसर: पोटा केबिन छात्रावासों का निर्माण संवेदनशील क्षेत्रों में बच्चों की सुरक्षा के लिए किया गया था। ऐसे में छात्राओं के गर्भवती होने की घटना ने हॉस्टल के भीतर की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।
शिक्षा विभाग: जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और सहायक आयुक्त (आदिवासी विकास) की निगरानी प्रणाली अब जांच के घेरे में है।
3. अब तक की प्रशासनिक कार्रवाई:
जैसा कि जिला प्रशासन ने पहले ही अपर जिलाधिकारी (ADM) की अध्यक्षता में एक 4 सदस्यीय जांच समिति गठित की है, उन्हें अब इन नए तथ्यों (गर्भवती कार्ड जारी होना) की भी जांच करनी होगी। समिति को 23 मार्च 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी है।
प्रमुख विसंगतियां (Key Gaps):
| विभाग | विसंगति/सवाल |
| स्वास्थ्य विभाग | कार्ड बनाने के बावजूद प्रशासन और पुलिस को सूचित क्यों नहीं किया गया? |
| हॉस्टल प्रबंधन | 5 महीने तक गर्भवती होने के लक्षणों को अधीक्षिका ने क्यों नहीं पहचाना? |
| शिक्षा विभाग | रूटीन चेकअप और छात्राओं की स्वास्थ्य जांच की रिपोर्ट कहाँ है? |
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