नयी दिल्ली: भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 में अब तक का सबसे अधिक 56,681 मिलियन यूनिट (MU) बिजली उत्पादन कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में जानकारी दी कि पिछले तीन वर्षों में उत्पादन में लगातार वृद्धि हुई है। यह विकास भारत के 'विकसित भारत 2047' के विजन और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रमुख आंकड़े और उपलब्धियां:
उत्पादन में निरंतर वृद्धि:
2022-23: 45,855 MU
2023-24: 47,971 MU
2024-25: 56,681 MU (पिछले वर्ष के मुकाबले करीब 18% की वृद्धि)
वर्तमान क्षमता: देश में अभी 24 परमाणु संयंत्र संचालित हैं (राजस्थान यूनिट-1 को छोड़कर), जिनकी कुल स्थापित क्षमता 8,780 मेगावाट (MW) है।
भविष्य का रोडमैप: सरकार ने 13,600 मेगावाट क्षमता वाले 18 नए रिएक्टरों पर काम शुरू कर दिया है। इसमें 10 रिएक्टर निर्माणाधीन हैं और 8 प्री-प्रोजेक्ट चरण में हैं।
कल्पक्कम PFBR अपडेट: तमिलनाडु के कल्पक्कम में 500 मेगावाट का 'प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर' (PFBR) अपने अंतिम चरण में है और इसके सितंबर 2026 तक चालू होने की उम्मीद है। यह भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव है।
'शांति' (SHANTI) अधिनियम और 2047 का लक्ष्य:
भारत का लक्ष्य 2047 तक अपनी परमाणु क्षमता को 100 गीगावाट (GW) तक ले जाना है। इसे संभव बनाने के लिए हाल ही में पारित 'शांति' अधिनियम एक क्रांतिकारी बदलाव है। इसके जरिए परमाणु क्षेत्र में निजी भागीदारी के रास्ते खोले गए हैं और पुराने कानूनों को निरस्त कर 'स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स' (SMRs) को बढ़ावा दिया जा रहा है।
| आगामी प्रमुख प्रोजेक्ट्स | क्षमता (MW) | स्थान |
| कुडनकुलम 3 और 4 | 2 x 1000 | तमिलनाडु |
| गोरखपुर 1 और 2 | 2 x 700 | हरियाणा |
| कैगा 5 और 6 | 2 x 700 | कर्नाटक |
| PFBR (कल्पक्कम) | 500 | तमिलनाडु |
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