हैदराबाद: तेलंगाना विधानसभा का प्रश्नकाल बुधवार को मूसी नदी परियोजना की भेंट चढ़ गया। भारत राष्ट्र समिति के सदस्यों ने सरकार पर अव्यवस्थित कार्यप्रणाली का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन (Walkout) किया।

सरकार का पक्ष और भविष्य की योजना:

आईटी और उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने परियोजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की:

  • सिंगापुर की कंपनी का चयन: दिसंबर 2024 में 'मीन्हार्ड्ट' (Meinhardt) को डीपीआर तैयार करने का जिम्मा दिया गया था, जिसने फरवरी 2026 में अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

  • एडीबी (ADB) फंडिंग: सरकार ने एशियाई विकास बैंक को वित्तपोषण का प्रस्ताव भेजा है। मंत्री को उम्मीद है कि बोर्ड की अगली बैठक में विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को आधिकारिक मंजूरी मिल जाएगी।

  • वैकल्पिक मार्ग: यदि एडीबी से बात नहीं बनती है, तो सरकार सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के जरिए इस परियोजना को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

  • लक्ष्य: गंदे नाले में तब्दील हो चुकी मूसी नदी को साल भर बहने वाली एक स्वच्छ नदी के रूप में विकसित करना।

बीआरएस (BRS) के आरोप और आपत्तियां:

कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव (KTR) ने सरकार को घेरते हुए कई सवाल दागे:

  1. डीपीआर पर संशय: केटीआर ने आरोप लगाया कि मंत्री चरणों की संख्या और डीपीआर के विवरण पर स्पष्ट नहीं हैं। उन्होंने एक अधिकारी का हवाला देते हुए दावा किया कि वास्तव में कोई ठोस डीपीआर मौजूद ही नहीं है।

  2. भ्रष्टाचार का अंदेशा: विपक्षी दल ने परियोजना के क्रियान्वयन और कंसल्टेंसी के चयन में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की आशंका जताई।

  3. स्पष्टीकरण: केटीआर ने साफ किया कि बीआरएस नदी की सफाई के खिलाफ नहीं है, बल्कि वह सरकार की 'अव्यवस्थित कार्यशैली' का विरोध कर रही है।

उपमुख्यमंत्री का पलटवार:

उपमुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए पूछा कि क्या बीआरएस नदी किनारे नारकीय जीवन जी रहे गरीबों की स्थिति सुधारने के खिलाफ है? उन्होंने विपक्षी दल पर केवल "कीचड़ उछालने" की राजनीति करने का आरोप लगाया।

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