रायपुर: ईओडब्ल्यू ने आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष और एक सरकारी पर्यवेक्षक को गिरफ्तार कर इस ठगी के जाल को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
1. घोटाले का मुख्य सूत्रधार और 'मोडस ऑपरेंडी':
मुख्य आरोपी: आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति के अध्यक्ष थावर दास माधवानी।
फर्जी लाभार्थी: थावर दास ने अपने रिश्तेदारों और परिचितों के नाम का उपयोग कर 186 लोगों के फर्जी दस्तावेज तैयार किए।
लोन का खेल: प्रति व्यक्ति 1 लाख रुपये के हिसाब से मध्य प्रदेश सहकारी आवास संघ से कुल 1.86 करोड़ रुपये का लोन स्वीकृत कराया गया।
वास्तविकता: जमीन और घर के नाम पर लिए गए इस पैसे का उपयोग कभी भी निर्माण कार्य के लिए नहीं हुआ, बल्कि पूरी राशि का गबन कर लिया गया।
2. सरकारी तंत्र की मिलीभगत:
बिना किसी भौतिक सत्यापन (Physical Verification) के इतना बड़ा लोन स्वीकृत होना अधिकारियों की मिलीभगत के बिना संभव नहीं था।
गिरफ्तार अधिकारी: तत्कालीन आवास पर्यवेक्षक बसंत साहू।
आरोप: बसंत साहू पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए बिना जांच किए फाइलों को आगे बढ़ाया और इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने में माधवानी की मदद की।
3. 26 साल बाद न्याय की उम्मीद:
यह मामला दशकों से फाइलों में दबा हुआ था, लेकिन ईओडब्ल्यू की सक्रियता ने लंबे समय से फरार चल रहे इन आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। इस कार्रवाई से यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार के मामले चाहे कितने भी पुराने क्यों न हों, कानून के हाथ उन तक पहुँच ही जाते हैं।
प्रमुख विवरण: एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
| मामला | आधुनिक गृह निर्माण सहकारी समिति घोटाला |
| समय काल | अविभाजित मध्य प्रदेश (करीब 26 वर्ष पूर्व) |
| कुल राशि | ₹1.86 करोड़ |
| फर्जी नाम | 186 व्यक्ति (प्रत्येक ₹1 लाख लोन) |
| मुख्य धाराएं | भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और धोखाधड़ी (IPC/BNS) |
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