श्रीनगर: कश्मीर प्रशासन ने सोमवार को 'शब-ए-कद्र' (मग्फिरत की रात) के मौके पर ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में सामूहिक नमाज और इबादत पर रोक लगा दी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाया गया था।

प्रमुख घटनाक्रम और विवाद के बिंदु:

  • सुरक्षा घेरा: श्रीनगर के नौहट्टा (Nowhatta) इलाके में स्थित इस मस्जिद के बाहर सुरक्षा बलों की भारी तैनाती कर दी गई और प्रवेश द्वारों को बंद रखा गया।

  • प्रशासन का तर्क: अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें खुफिया इनपुट मिले थे कि भीड़ का फायदा उठाकर कुछ तत्व कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ सकते हैं। अतः, एहतियातन मस्जिद को रात भर की इबादत के लिए बंद रखने का फैसला लिया गया।

  • मीरवाइज की नजरबंदी: अंजुमन औकाफ जामिया मस्जिद के प्रमुख और धर्मगुरु मीरवाइज उमर फारूक ने आरोप लगाया कि उन्हें उनके घर में नजरबंद कर दिया गया है, ताकि वे जामिया मस्जिद पहुंचकर इबादत का नेतृत्व न कर सकें।

  • धार्मिक महत्व: 'शब-ए-कद्र' रमज़ान की सबसे पवित्र रातों में से एक मानी जाती है, जिसमें हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु मस्जिदों में रात भर प्रार्थना (इबादत) करते हैं। जामिया मस्जिद कश्मीर में इन प्रार्थनाओं का मुख्य केंद्र रही है।

प्रतिक्रिया और माहौल:

स्थानीय नागरिकों और धार्मिक संगठनों ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता पर इस तरह की पाबंदी से समुदाय में असुरक्षा और निराशा का भाव पैदा होता है। हालांकि, प्रशासन का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता जनहानि को रोकना और शांति बनाए रखना है।


निष्कर्ष:

कश्मीर में धार्मिक आयोजनों और सुरक्षा चिंताओं के बीच यह खींचतान नई नहीं है, लेकिन जामिया मस्जिद जैसे प्रतीकात्मक स्थल का बंद होना घाटी की राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता के लिए हमेशा एक संवेदनशील मुद्दा रहा है।

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