1. पेयजल संकट का स्थायी समाधान
जिला मुख्यालय से 88 किमी दूर स्थित इस गांव में ग्रामीण दशकों से दूषित नालों और सूखते कुओं के भरोसे थे।
लागत: ₹72.01 लाख की स्वीकृत योजना।
तकनीक: 4 सोलर पंप आधारित टंकियों की स्थापना।
लाभ: गांव के सभी 117 घरों में शुद्ध पेयजल का कनेक्शन। अब 465 की आबादी को पानी के लिए मीलों पैदल नहीं चलना पड़ता।
2. दहशत के साये से लोकतंत्र की रोशनी तक
ग्रामीण तेलाम बुधु की बातें क्षेत्र में आए बड़े बदलाव की गवाह हैं। उन्होंने बताया कि जहाँ पहले गांव में नक्सलियों की बैठकें होती थीं और राशन-पैसा वसूला जाता था, अब वहां ग्राम विकास की बैठकें होती हैं।
बदलाव: अब चर्चा लेवी (वसूली) की नहीं, बल्कि बिजली, सड़क, राशन और शिक्षा की होती है।
सुरक्षा: शासन की सक्रियता से ग्रामीणों के मन से नक्सलियों का भय कम हुआ है और वे मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
3. 'बाड़ी' से आत्मनिर्भरता और बेहतर स्वास्थ्य
नल से जल पहुँचने का असर केवल प्यास बुझाने तक सीमित नहीं रहा:
सब्जी-बाड़ी: ग्रामीण अब अपने घरों के पीछे टमाटर, मिर्ची, बरबट्टी और भाजी उगा रहे हैं। इससे कुपोषण दूर हो रहा है और बाजार पर निर्भरता कम हुई है।
स्वच्छता: शुद्ध पानी मिलने से जलजनित बीमारियों (Water-borne diseases) में भारी कमी आई है, जिससे ग्रामीणों के स्वास्थ्य और कार्यक्षमता में सुधार हुआ है।
प्रशासनिक दृष्टिकोण:
सुकमा कलेक्टर अमित कुमार के अनुसार, लखापाल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुँचाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह सफलता साबित करती है कि सरकार की नियत साफ हो, तो विकास बस्तर के अंतिम छोर तक पहुँच सकता है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
योजना: जल जीवन मिशन + नियद नेल्लानार योजना।
क्षेत्र: कोंटा विकासखंड, जिला सुकमा।
महिला सशक्तिकरण: लखे तेलाम जैसी महिलाओं को महुआ बीनने के बाद पानी ढोने की मशक्कत से मुक्ति मिली।
प्रभावी क्रियान्वयन: सोलर आधारित सिस्टम से बिजली कटौती के बावजूद निर्बाध जल आपूर्ति।
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