रायपुर (3 अप्रैल 2026): हनुमान जन्मोत्सव के अनुष्ठानों के बीच भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने एक-दूसरे पर तीखे कटाक्ष किए हैं। प्रभु श्री राम के काज संवारने वाले हनुमान जी के नाम पर अब अपनी-अपनी राजनीति संवारने की होड़ मची है।
1. रामविचार नेताम (कृषि मंत्री, भाजपा) का वार:
हनुमान की गदा: नेताम ने कहा कि कांग्रेस पर हनुमान जी की गदा पहले ही पड़ चुकी है। उनके अनुसार, जिस दिन कांग्रेस ने अयोध्या में रामलला के प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण (आतिथ्य) ठुकराया था, उसी दिन उनका पतन सुनिश्चित हो गया था।
भविष्यवाणी: उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी या फिर उसके नेता आत्मसमर्पण कर भाजपा में शामिल हो जाएंगे।
2. धनेंद्र साहू (वरिष्ठ कांग्रेस नेता) का पलटवार:
कालनेमि का व्यंग्य: पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने रामायण के पात्र 'कालनेमि' (छल करने वाला राक्षस) का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे नेता भाजपा के भीतर ही मौजूद हैं।
असली भक्ति: साहू ने तर्क दिया कि कांग्रेस हमेशा से राम-कृष्ण की भक्त रही है, जबकि भाजपा केवल राजनीति चमकाने के लिए भगवान के नाम का उपयोग करती है। उन्होंने पलटवार किया कि हनुमान जी की गदा वास्तव में भाजपा पर ही चलेगी।
सियासी बहस के मुख्य सवाल:
| पक्ष | मुख्य तर्क | प्रतीक |
| भाजपा | कांग्रेस ने राम मंदिर का विरोध किया, इसलिए वे रसातल में जा रहे हैं। | हनुमान की गदा (विनाश के लिए) |
| कांग्रेस | भाजपा धर्म का व्यापार कर रही है और उनके बीच 'कालनेमि' जैसे छद्म भक्त हैं। | कालनेमि (छल के लिए) |
निष्कर्ष: भक्ति या शक्ति प्रदर्शन?
हनुमान जयंती जैसे पवित्र दिन पर भी इस तरह की बहस यह दर्शाती है कि आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की राजनीति में 'हिंदुत्व' और 'राम भक्ति' सबसे बड़े मुद्दे बने रहेंगे। जहाँ भक्त हनुमान जी के चरणों में आशीर्वाद मांग रहे हैं, वहीं नेता एक-दूसरे के लिए 'गदा' और 'विनाश' की कामना कर रहे हैं।
जनता के मन में यह सवाल जरूर है कि क्या भक्ति के पर्व पर भी यह राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन अनिवार्य था?
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