कांडला/विशाखापत्तनम (4 अप्रैल 2026): भारत ने दुनिया को स्वच्छ ईंधन आपूर्ति करने की दिशा में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। गुजरात के कांडला बंदरगाह से 'ग्रीन अमोनिया' की पहली व्यावसायिक खेप जर्मनी के लिए रवाना की गई। इसके साथ ही भारत 'शून्य उत्सर्जन' वाले ईंधन का निर्यात करने वाले दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल हो गया है।
विस्तृत विश्लेषण:
स्वच्छ तकनीक: यह अमोनिया पूरी तरह से सौर और पवन ऊर्जा के माध्यम से 'इलेक्ट्रोलाइजर' तकनीक से बनाई गई है। पारंपरिक अमोनिया के विपरीत, इसके उत्पादन में कार्बन का रत्ती भर भी उत्सर्जन नहीं होता। भारत में रिलायंस और अडाणी ग्रुप के नए प्लांट्स ने इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर दिया है।
ऊर्जा कूटनीति: जर्मनी और जापान जैसे विकसित देशों ने अपनी औद्योगिक ऊर्जा जरूरतों के लिए भारत के साथ 10 साल के 'सप्लाई एग्रीमेंट' किए हैं। यह भारत को वैश्विक ऊर्जा संकट के समय एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में स्थापित करता है।
लागत में गिरावट: बड़े पैमाने पर उत्पादन और सरकारी पीएलआई (PLI) स्कीम के कारण ग्रीन अमोनिया की उत्पादन लागत पिछले दो वर्षों में 40% कम हुई है, जिससे यह अब प्राकृतिक गैस से बनी अमोनिया को टक्कर दे रही है।
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