चंडीगढ़: हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुआ मुकाबला किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं रहा। सोमवार आधी रात के बाद तक चली खींचतान और मतगणना में गोपनीयता के उल्लंघन के आरोपों के बीच, भाजपा के संजय भाटिया और कांग्रेस के करमवीर सिंह बौद्ध को निर्वाचित घोषित किया गया।
मुख्य घटनाक्रम और विवाद:
मतगणना में देरी: शाम 5 बजे शुरू होने वाली गिनती रात 10 बजे के बाद शुरू हो सकी। भाजपा और कांग्रेस, दोनों ने एक-दूसरे पर 'वोट की गोपनीयता' भंग करने के आरोप लगाए, मामला चुनाव आयोग तक पहुँचा।
क्रॉस-वोटिंग का साया: कांग्रेस के लिए यह जीत 'अग्नि परीक्षा' जैसी रही। पार्टी के 5 विधायकों ने कथित तौर पर क्रॉस-वोटिंग की, जिनमें से 4 के वोट अमान्य घोषित कर दिए गए। यदि ये वोट वैध होते या निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को मिलते, तो समीकरण बदल सकते थे।
इनेलो की दूरी: अभय सिंह चौटाला और आदित्य देवी लाल (इनेलो) ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया, जिससे प्रभावी वोटों की संख्या 88 रह गई। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इसे कांग्रेस की 'बी-टीम' वाली रणनीति करार दिया।
नेताओं की प्रतिक्रिया:
"यह प्रजातंत्र की जीत और वोट चोरी की हार है। भाजपा ने हर चाल चली, लेकिन कांग्रेस सफल रही।" — भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व मुख्यमंत्री
"कांग्रेस को अपने ही विधायकों पर भरोसा नहीं था, इसलिए उन्हें बंधक बनाकर हिमाचल ले जाया गया। कांग्रेस खत्म हो चुकी है।" — नायब सिंह सैनी, मुख्यमंत्री
चुनावी अंकगणित:
संजय भाटिया (भाजपा): 39 प्रथम वरीयता वोटों के साथ आसान जीत।
करमवीर सिंह बौद्ध (कांग्रेस): 28 वोट पाकर विजयी।
सतीश नांदल (निर्दलीय/भाजपा समर्थित): 16 वोट मिले, नजदीकी मुकाबले में हार का सामना करना पड़ा।
कांग्रेस ने अब अपने उन विधायकों पर कड़ी कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं जिन्होंने पार्टी लाइन से हटकर मतदान किया या जिनके वोट अमान्य हुए।
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